मोटू खरगोश

एक बार की बात है, गाँव के पास एक छोटा सा खरगोश रहता था, जिसका नाम मोटू था. 
मोटू बहुत ही मिलनसर और सहानुभूति था. वह गाँव के अन्य जानवरों के साथ मिलकर खुश रहता था. एक दिन, मोटू गाँव के अन्य जानवरों से एक अद्वितीय खासियत सुनाने आया कि वह कभी भी किसी भी दुखी आत्मा की मदद करता था. 
वह जानवरों की सुनता-समझता था और उनकी समस्याओं का समाधान निकालता था. इसके बाद से, मोटू ने अपने दिल से फैसला किया कि वह अपना जीवन दुसरों की मदद करने में ही व्यतीत करेगा. मोटू अब गाँव के बच्चों को बचपन के गुफा कहानियाँ सुनाने लगा और बूढ़ों की समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने में मदद करता था. उसकी मदद से लोग खुश और संतुष्ट होते थे. 
उसकी एक समस्या का समाधान करने के बाद, एक बूढ़ा आदमी ने मोटू से पूछा, "तुम्हारी इतनी सारी मदद के बावजूद, क्या तुम खुद खुश हो?" मोटू मुस्कराया और बोला, "हां, मैं खुश हूँ, क्योंकि जब मैं दूसरों की मदद करता हूँ, तो मेरा खुद का दर्द भूल जाता है. और मेरे दोस्तों के साथ ही मेरा दर्द भी घट जाता है." इस कहानी से सिखने वाला संदेश है कि हम जब दूसरों की मदद करते हैं, तो हमारा खुद का दर्द भी कम हो जाता है और हम खुशी का अहसास करते हैं. दादा ने अपनी पोती को इस कहानी से यह सिखने को कह रहे थे कि सच्ची खुशी दूसरों की मदद करने में है. पोती ने दादा की इस कहानी को ध्यान से सुना और समझा. वह भी यह सिख रही थी कि हमें दूसरों की मदद करने में खुशी मिलती है और यह हमारा अपना दर्द कम कर सकता है.

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